बच्चे शांति दूत बनकर अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे

भोपाल। श्री ब्रह्मानंद सरस्वती आश्रम छान में आज अक्षय तृतीया एवं सह्शिर्षा पुरूषा मंडल के स्थापना दिवस पर 32 छात्र-छात्रों एवं आठ शिक्षकों ने महर्षि विश्व शांति आंदोलन के शांति के स्वयं सेवक के रूप में शपथ एवं संकल्प लिया। इस अवसर पर महर्षि विश्व शांति आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश ने कहा कि आज अक्षय तृतीया का जो पावन मुहूर्त है वह निरंतरता में है। कल ही यहां पर वासुदेवानंद सरस्वती जी ने कहा है कि विश्व गुरू महर्षि महेश योगी जी ने जो भी संकल्प किये थे उसे हमें फलीभूत करना होगा। आज विश्वपटल पर अमेरिका एवं रूस के बीच जो तनाव बढ़ रहा है उससे पूरे विश्व को तृतीय विश्व युद्ध की सुगबुगाहट होने लगी हैं। हम यहां शांति की बात करने के लिए इक_े हुए हैं इस वर्ष विश्व शांति आंदोलन का एक दशक पूरा हो रहा है। आज हमने 32 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को अलंकृत कर शपथ एवं संकल्प दिलाया है ताकि शांति का दूत बनकर वह अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकें। इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में इन बच्चों का नाम होगा कि इन्हें अक्षय तृतीया के दिन शांति का स्वयंसेवक नियुक्त किया गया था। यह शांति की माला है।
इन सभी तनावों से मुक्ति के लिए वैदिक उपाय हमारे पास हैं जिसका उपयोग कर हम पूरे विश्व को शांति के मार्ग पर लाने का प्रयास करें। कार्यक्रम में 32 छात्र-छात्राओं एवं आठ शिक्षकों को शांति के स्वयं सेवक के रूप में कार्य करने के लिए शपथ एवं संकल्प दिलाकर अलंकृत किया गया। इस अवसर पर महर्षि विश्व शांति आंदोलन के महासचिव व्ही. आर. खरे, महर्षि प्रबंधन संस्थानों के राष्ट्रीय समन्वयक टी. पी. एस. कांद्रा, विश्व शांति आंदोलन की संचार सचिव आर्या नंदकुमार एवं महर्षि वैदिक विश्व विद्यालय के प्रो. निलिम्य त्रिपाठी मौजूद थे।


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