सालभर बाद भी 14 राज्यों में रेरा का पोर्टल नहीं

– सिर्फ एमपी, महाराष्ट्र और पंजाब में स्थाई रेग्युलेटर नियुक्त
– बायर्स को नहीं मिल रही है किसी तरह की मदद
वाणिज्य डेस्क. भोपाल/नई दिल्ली
रियल एस्टेट पर अपने शिकंजे को कसने और घर खरीदारों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए रियल एस्टेट रेग्यूलेशन एक्ट (रेरा) को लागू हुए आज एक साल पूरे हो गए। लेकिन इस एक्ट के लागू हो जाने के बाद भी बायर्स को किसी तरह को कोई फायदा धरातल पर नहीं मिला है। इससे बायर्स के मन में इस एक्ट को लेकर संदेह बना हुआ है, क्योंकि कई राज्यों में इसके लिए पोर्टल तक नहीं बना है।
– 20 राज्यों ने किया नोटिफाई
जानकार के अनुसार जम्मू-कश्मीर को छोड़कर के पूरे देश में रेरा कानून लागू है। इन 28 राज्यों में भी केवल तीन ने ही अपने स्थाई रेग्यूलेटर को नियुक्त किया है। वहीं 20 राज्यों में इसका नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इसके बावजूद 14 राज्यों ने रेरा के लिए अलग से पोर्टल शुरू किया है। इतना होने के बाद भी ग्राहकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
– इन राज्यों ने शुरू नहीं किया वेबपोर्टल
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब ने ही केवल स्थाई तौर पर रेग्यूलेटर को नियुक्त किया है। अन्य राज्यों ने केवल इस पद पर अस्थाई तौर पर रेग्यूलेटर की नियुक्ति की गई है। हालांकि असम, हरियाणा, केरल, तेलंगाना और ओडिशा ने अभी तक रेरा के लिए अलग से पोर्टल नहीं शुरू किया है।
– इन राज्यों के पोर्टल नहीं मिलती पूरी जानकारी
यूपी, बिहार, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों रेरा के पोर्टल पर जो जानकारी डेवलपर्स द्वारा अपलोड की जा रही है वो बायर्स के लिए नाकाफी है। ऐसा इसलिए क्योंकि रेरा के तहत सभी चल रहे प्रोजेक्ट्स के बारे में अगस्त 2017 तक रजिस्ट्रेशन करना होगा, लेकिन ऐसे कई प्रोजेक्ट्स जिनको पजेशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है और वो रेरा में रजिस्टर्ड नहीं हो सके हैं।
– पश्चिम बंगाल सरकार ने नहीं किया नोटिफाई
जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने इस कानून को अभी तक नोटिफाई भी नहीं किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के सभी राज्य भी इसी कतार में शामिल हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो राज्य सरकार भी इसे लागू करने में फिसड्डी साबित हो गई हैं। ऐसे में कैसे बिल्डर्स धोखाधड़ी करने से बाज आएंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
गरीबों के साथ के्रडाई का भी ख्याल रखें सरकार
क्रेडाई पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय आवास एवं शहरी नियोजन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी से मुलाकात कर उनको 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के संबंध में सुझाव दिए। निम्न और मध्यम वर्ग को आसानी से घर देने के लिए के्रडाई की ओर से नियमों में परिवर्तन की मांग की।
क्रेडाई पदाधिकारियों ने कहा कि पीएम आवास योजना में के्रडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम में मध्यमवर्ग, एक के तहत छह से 12 लाख की वार्षिक आय वाले परिवार और मध्य वर्ग -2 में 12 से 18 लाख की वार्षिक आय वर्ग के परिवारों को शामिल किया गया है, लेकिन उनके लिए मकान का एरिया 120 वर्ग मीटर और 150 वर्ग मीटर रखा गया है। के्रडाई ने कहा कि जिस तरह आर्थिक रूप से पिछड़े और अल्प आर्य वर्ग के लोगों के लिए कारपेट एरिया की सीमा तय नहीं है, उसी तरह मध्य आर्य के भवनों के कारपेट एरिया की सीमा भी तय न हो। इस योजना का लाभ वही ले सकते हैं, जिनका देशभर में कहीं भी कोई पक्का घर नहीं है, जबकि इसमें स्लम में बने पक्के घर भी आते हैं। अगर यह स्कीम लागू होती है तो स्लैम में पक्के घरों में रहने वाले इस योजना से बाहर हो जाएंगे। के्रडाई ने इस प्रावधान को समाप्त करने की मांग की।
रेरा के सेक्शन 16 (1) में प्रमोटर को भूमि का बीमा कराना जरूरी बताया गया जबकि मार्केट में जमीन का बीमा करने वाली कोई कंपनी नहीं है, इसलिए ऐसे संस्था बनने तक यह प्रावधान स्थगित करने की मांग की। अफोर्डेबल हाउसिंग को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देने के लिए सरकार की प्रशंसा करते हुए क्रेडाई ने सरकार से हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए बैंकों को लोन देने का आग्रह किया। के्रडाई ने आवास मंत्री को बरेली में भवन निर्माण के लिए डेवलपर्स के समक्ष उपस्थित समस्याओं से अवगत कराया और कहा कि कमजोर और मध्यम वर्ग के परिवारों को भवन खरीदने के लिए अधिक सुविधाएं मिलें क्योंकि इस वर्ग को सबसे ज्यादा मकान की जरूरत है।


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