तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग

जाबालि ऋषि की तपोभूमि कही जाने वाली बड़ी खेरमाई मां कलचुरी राजाओं की कूलदेवी रही हैं। यहां आज भी तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। नवरात्र के दौरान विशेष पूजन अर्चन व शृंगार किया जाता है। संतान पाने के लिए भी महिलाएं यहां पहुंचती हैं। भानतलैया स्थित बड़ी खेरमाई मंदिर कल्चुरी काल शासकों की कुलदेवी हैं। भक्तों की मान्यता है कि यहां पूजन-अर्चन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि कल्चुरी कालीन राजा जाजल्य देव ने तापस मठ की स्थापना की थी, वह मठ बड़ी खेरमाई मंदिर ही है। देवी का ये प्राचीन मंदिर 10-11 वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कल्चुरिकाल में तापस मठ काफी प्रसिद्ध था। कई राजाओं और प्रजा की खासी आस्था यहां से जुड़ी थी। नवरात्रि में जला रहे हैं अखंड ज्योति तो जरूर नवरात्र पर्व पर मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर अनेक मान्यताओं के लिए भी प्रचलित है। यहां हर साल नवरात्र पर्व पर रात्रि करीब 2 बजे से भक्तों की कतार मां को जल अर्पित करने के लिए लग जाती है। मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं भी प्रचलित हैं। जिसकी वजह से आमदिनों में भी यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
बूढ़ी खेरमाई मंदिर
ये मंदिर जिस क्षेत्र में स्थित है वह पूर्णत: मुस्लिम है। यहां समीप ही मीना बाजार भरा जाता है, जहां ईद के दौरान बड़ी रौनक रहती है। यह मंदिर भी प्राचीन कालीन बताया जाता है। माता भी अपने भक्तों की मन्नत पूरी के लिए जानी जाती हैं। नवरात्र पर्व पर विशेष पूजन यहां आयोजित किया जाता है। त्रिपुर सुन्दरी मंदिर, शारदा मंदिर बेरला व मदन महल, बगलामुखी मंदिर सिविक सेंटर, कालीधाम कालीघाट, कालीमठ मदन महल व अन्य देवी मंदिरों की भी खासी मान्यताएं हैं। जबलपुर शहर में नवरात्र पर्व के दौरान इन दैविय स्थानों पर खासा उत्सव का माहौल देखने मिलता है


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