ऑनलाइन मार्केट वाले अब ऑफलाइन बाजार में जमाएंगे पैठ

सरकार रोके करार, चौपट हो जाएगा छोटे दुकानदारों का धंधा
वाणिज्य प्रतिनिधि ॥ भोपाल
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स सहित विभिन्न व्यापारिक संगठन वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट के बीच होने वाले करार के खिलाफ हैं। व्यापारिक संगठनों ने सरकार से मांग की है इन दोनों बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच होने वाली डील पर हस्ताक्षेप करें ,ताकि उक्त कंपनियों ऑनलाइन मार्केट के जरिए देश के ऑफ लाइन बाजार में पैठ नहीं जमा पाए। अगर ऐसा हुआ तो मध्यप्रदेश सहित देशभर के छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट हो जाएगा। व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के कहना है कि सरकार कोई ऐसा रास्ता निकलते जिससे इस डील से ट्रेडर्स और रिटेलर्स को कोई नुकसान न हो। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने विभिन्न ट्रेडों से जुड़े व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार को चेताया कि आगामी 10 दिन में वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट के बीच होने वाले इस डील पर केंद्र सरकार हस्ताक्षेप करते हुए व्यापारियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है और व्यापारियों को निराश करती है कि तो देशभर के व्यापारी आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगें। इसके साथ ही कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। गौरतलब है कि वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट के बीच होने जा रही डील को लेकर व्यापारियों कथन है कि वॉलमार्ट ऑनलाइन मार्केट के जरिए देश के ऑफलाइन बाजार में उतरेगी। जिससे छोटे रिटेलर्स का धंधा चौपट हो जाएगा। यह डील न हो इसके इसे लेकर विभिन्न ट्रेडों से जुड़े व्यापारियों और दुकानदारों ने सरकार से गुहार लगाई हैं । व्यापारियों के अनुसार हाल ही में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अमेरिका की दिग्गज रिटेल कंपनी वॉलमार्ट को करीब 75 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के एग्रीमेंट को मंजूरी दे दी है। यह सौदा लगभग 99 हजार करोड़ रुपए का होगा। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक वॉलमार्ट के साथ गूगल, पेरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक भी इस इन्वेस्टमेंट में हिस्सा ले सकती है। माना जा रहा है कि 10 दिन के भीतर डील पूरी हो सकती है।
सरकार करे डील की जांच
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के सेके्रटरी जनरल प्रवीण खंडलेवाल ने बताया कि वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील से भारत के छोटे रिटेलर्स को काफी नुकसान होगा। वॉलमार्ट भले ही ई-कॉमर्स में एंट्री कर रहा है, लेकिन आगे चलकर उसके ऑफ लाइन बिजनेस में आने के पूरे आसार हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस डील की जांच करे। उनका यह भी कहना है कि कि इस डील को होने से रोका जाए वरना वॉलमार्ट जैसी दुनिया की अन्य कंपनियां भी ई-कॉमर्स के जरिए देश में एंट्री करेंगी और छोटे रिटेलर्स का पूरा बिजनेस बर्बाद हो जाएगा।
कैसे होगा नुकसान
खंडेलवाल का कहना है कि ऐसी कंपनियां पूरी दुनिया में से कहीं से भी सामान लाएंगी और देश को डंपिंग ग्राउंड बना देंगी। लेवल प्लेइंग फील्ड एक समान नहीं होने के चलते भारतीय रिटेलर्स उनका कॉम्पिटीशन नहीं कर पाएंगे और उनका बिजनेस बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें विदेशी कपंनियों द्वारा भारत में इन्वेस्टमेंट पर एतराज नहीं है। विदेशी कपंनियां एफडीआई के जरिए देश में इन्वेस्ट करें, लेकिन ई-कॉमर्स का सहारा लेना गलत है।
ई-कॉमर्स के लिए बनाए कानूनों का नहीं हो रहा पालन
कैट भोपाल इकाई के अध्यक्ष रामबाबू शर्मा ने कहा कि देश में ई-कॉमर्स के लिए जो कायदे-कानून बनाए गए हैं, उनका पालन नहीं हो रहा है। एफडीआई की 2016 की पॉलिसी के मुताबिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म केवल बायर-सेलर प्लेटफॉर्म रहेंगे। वे खुद के प्रोडक्ट नहीं बेच सकते हैं। लेकिन ये प्लेटफॉर्म नियमों के खिलाफ जाकर अपनी शेल कंपनियों के जरिए खुद के प्रोडक्ट भी अपने प्लेटफॉर्म पर बेचने लगे हैं। यहां तक कि माल रखने के लिए उनके वेयरहाउस भी हैं। दूसरा वे कीमतों के मामले में भी ग्राहकों को लुभाते हैं, जो कि पॉलिसी का उल्लंघन है। अब वॉलमार्ट के आ जाने से स्थिति और खराब हो जाएगी।
ई-कॉमर्स के लिए बनाई जाए रेगुलेटरी अथॉरिटी
भोपाल स्टॉक इंवेस्टर एसोसिएशन के चेयरमैन संतोष अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ई-कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन करें। जब तक यह अथॉरिटी न बन जाए,इस तरह की किसी भी डील को मंजूरी न दी जाए। ई-कॉमर्स क्षेत्र में होने वाली हर डील की जांच अथॉरिटी द्वारा की जाए।
पहले भी वॉलमार्ट कर चुकी है भारतीय बाजार में उतरने की कोशिश
विदेशी कंपनियों के लिए एफडीआई रूट होने के बावजूद वह अलग-अलग तरीके से देश के मार्केट में घुसने की कोशिश कर रही हैं। वॉलमार्ट ने भी यही किया है। एफडीआई के जरिए भारत के रिटेल सेक्टर में आने की कोशिश कामयाब न रहने पर अब वॉलमार्ट ने ई-कॉमर्स का सहारा लिया है। ज्ञात हो कि वॉलमार्ट 2007 में भारतीय एंटरप्राइजेज के साथ एक जॉइंट वेंचर के जरिए भारत में होलसेल बिजनेस में आने वाली थी। लेकिन देश की पॉलिसीज के चलते वह यहां अपने मल्टी ब्रांड ऑपरेशंस शुरू करने में असफल रही। उसके बाद कंपनी ने भारती के साथ 2013 में अपने जॉइंट वेंचर को भी खत्म कर दिया।


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