मलैया सहित 3 मंत्री 15 विधायक 70 पार

प्रवीण शर्मा ॥ भोपाल
प्रदेश की राजनीति में बीते तीन दिनों से नेताओं की उम्र को लेकर धमाल मचा हुआ है। शुरूआत सत्तापक्ष ने की थी, जब कांग्रेस के नवागत प्रदेशाध्यक्ष व सांसद कमलनाथ को बुजुर्ग बताते हुए संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट किया था। इसके बाद से मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ पूरी भाजपा उम्र के सहारे नाथ की ताकत नापने में जुट गई है। जबकि समय गवाह है कि उम्र का तकादा देते हुए जिस भाजपा ने बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया था, उसी सरकार के तीन मंत्री इस चुनावी साल में ही 70 साल के हो गए हैं तो सत्तापक्ष के तेरह विधायकों की उम्र भी पार्टी द्वारा बनाए गए मार्गदर्शक मंडल का द्वार खटखटाने रही है।
खास बात यह है कि सांसद नाथ की उम्र का हवाला देकर मामले को हवा देने वाले वित्त मंत्री जयंत मलैया ही इस साल सबसे पहले 70 पार निकले हैं। फरवरी में ही वे 71 साल के हुए हैं। जबकि कुसुम मेहदेले अगस्त में 75 की हो जाएंगी। इसी तरह स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह भी 73 वें वर्ष में चल रहे हैं। सत्तापक्ष के नेता और मंत्री भले ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की उम्र को लेकर हंगामा मचा रहे हैं, मगर उम्र कांग्रेस से ज्यादा भाजपा में चिंता की बात है। वजह, दो साल पहले ही दो दिग्गजों बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को उम्रदराज मानते हुए प्रदेश मंत्रिमंडल से बाहर कर चुकी है। मोदी मंत्रिमंडल से भी नजमा हेपतुल्ला सहित चार चेहरे बाहर हो चुके हैं तो पार्टी के आधार स्तंभों में शुमार पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरलीमनोहर जोशी को मार्गदर्शक मंडल में बैठा दिया गया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी मार्गदर्शक मंडल बना तो अपनी स्थापना के साथ ही यह भरा-पूरा नजर आएगा। 15 वर्तमान विधायक भी नामांकन पत्र जमा करते समय ही 70 साल के पूरे हो जाएंगे। इसके चलते उनकी टिकट पर ही संकट गहराता नजर आ रहा है।
कांग्रेस में भी युवा चेहरों पर जोर
दूसरी ओर कांग्रेस में उम्र को लेकर ज्यादा तनाव नहीं है। अव्वल तो प्रदेशाध्यक्ष नाथ साफ कर चुके हैं कि प्रत्याशी के लिए केवल एक क्रायटेरिया होगा, वह है जिताऊ चेहरा। न उम्र आड़े आएगी और न संगठन का पद। बावजूद इसके यदि पार्टी उम्र का बंधन लगाती है तो सिरोंज के गोवर्धन उपाध्याय कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं, वे इसी साल सितंबर में 75 साल के हो रहे हैं। साठ साल का फार्मूला लागू होने के पर ही कुछ बड़े चेहरे प्रभावित होंगे, उनमें डॉ. राजेंद्र सिंह अमर पाटन, डॉ. गोविंद सिंह लहार, आरिफ अकील भोपाल उत्तर, यादवेंद्र सिंह नागौद, केपी सिंह पिछोर, अजय ङ्क्षसह राहुल चुरहट, मुकेश नायक पवई तथा सुंदरलाल तिवारी गुढ़ शामिल हैं। इन दिग्गज चेहरों के कारण ही हाईकमान का फार्मूला मध्यप्रदेश में नाकाम होना निश्चित माना जा रहा है।
गौर से 60 साल छोटी हैं भाजपा की मंजू
प्रदेश के सदन में जहां दसवीं बाद के विधायक बाबूलाल गौर इस चुनावी साल में 89 साल पूरे कर रहे हैं। वहीं उनसे 60 साल छोटी मंजू दादू भी भाजपा की ओर से ही सदन की सदस्य हैं। मंजू प्रदेश के वर्तमान सदन की सबसे युवा सदस्य हैं। वैसे उम्र के लिहाज से सदन में भाजपा की तुलना में कांग्रेस ज्यादा युवा है। कांग्रेस के खेमे में केवल एक सदस्य गोवर्धन उपाध्याय ही 60 पार हैं। उपाध्याय इस साल 75 वर्ष के हो रहे हैं। इनके बाद सीधे 1950 के जन्मे विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ही हैं। जबकि भाजपा के पांच विधायक 1950 तथा दो 1949 के जन्म वाले हैं। केडी देशमुख तो अगले साल एक जनवरी को ही 70 साल के हो जाएंगे। जबकि भंवर सिंह शेखावत 19 अगस्त को मार्गदर्शक मंडल के दायरे में आ जाएंगे।
बीजेपी में आजादी से पहले के ज्यादा, आधी कांग्रेस 50 की
कांग्रेस भले ही आजादी की लड़ाई में भाजपा के योगदान को लेकर सवाल उठाती हो, लेकिन सदन में सदस्यों का उम्र के हिसाब से लेखाजोखा देखा जाए तो आजादी तक के सालों में कांग्रेस काफी पीछे है और भाजपा का खाता ज्यादा बुलंद है। आजादी से पहले के कांग्रेस के पास केवल एक सदस्य गोवर्धन उपाध्याय हैं। पांच महीने पूर्व तक स्व. महेंद्र सिंह कालूखेड़ा और स्व. राम सिंह भी कांग्रेस की ओर से इसी पीढ़ी के थे। जबकि भाजपा के आठ सदस्य 1947 तक के हैं। इनमें सबसे वरिष्ठ बाबूलाल गौर हैं तो रमाकांत तिवारी, मोती कश्यप, सरताज सिंह, कुसुम मेहदेले, रुस्तम ङ्क्षसह और जयंत मलैया आजादी से पहले की पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस हिसाब से वर्तमान में कांग्रेस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व ज्यादा कर रही है। वर्तमान में कांग्रेस के कुल 55 में से 25 सदस्य इस साल 50 वर्ष की आयु वाले हैं। जबकि भाजपा में इस चुनावी साल में 50 वर्ष के होने वालों की संख्या कुल 165 सदस्यों में से मात्र 44 है। वहीं 50 से 60 वर्ष की आयु वर्ग में भी कांग्रेस की तुलना में भाजपा के सदस्यों की संख्या ज्यादा हैं। इस आयु वर्ग के कुल 83 में से कांग्रेस के 18 विधायक हैं तो भाजपा के एकमुश्त 61 विधायक शामिल हैं।


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