चुनाव तक रुकी रहेंगी रेल पटरियों की झुग्गियां

चुनाव खत्म होने के बाद ही दिसंबर में हट सकती हैं रेलवे पटरी की झुग्गियां
सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
राजधानी के भीतर ट्रेनों की रफ्तार में बाधा बनी 78 झुग्गियों को हटाने के लिए एक बार फिर राजनीति आड़े आ गई है। आगामी नवम्बर माह में होने वाले विधानसभा को देखते हुए झुग्गियों की शिफ्टिंग रोक दी गई है। अब दिसंबर के बाद ही झुग्गियां हटाई जाएंगी। झुग्गियां हटाने के लिए जिला प्रशासन ने पुलिस जवान और रेलवे से आरपीएफ का सहयोग मांगा था और शुक्रवार से झुग्गियां हटाना थी, लेकिन पुलिस बल न मिलने के कारण इसे टाल दिया गया है, लेकिन असली वजह चुनावी माहौल देखा जा रहा है।
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब केवल छह माह शेष रह गए हैं, ऐसे में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार जनता से किसी भी प्रकार की नाराजगी लेने के मूड में नहीं है और वह केवल मतदाताओं की सहानुभूति चाहती है। यही वजह है कि शहर में नगर निगम प्रशासन की कोई भी अतिक्रमण विरोधी बड़ी कार्यवाही नहीं हो रही है और जब भी अतिक्रमण विरोधी बड़ी कार्यवाही शुरू होती है, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सामने आकर उसे रुकवा देते हैं। इसी तरह हबीबगंज स्टेशन से भोपाल स्टेशन और बैरागढ़ स्टेशन के आसपास पटरी के किनारे बनी झुग्गियों को हटाने के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन और रेलवे ने संयुक्त रूप से योजना तैयार की, लेकिन कभी पुलिस बल की कमी, बारिश का बहाना, सर्दी, गर्मी और अन्य कारणों से झुग्गियों को नहीं हटाया जा सका है। अब चुनावी साल होने के कारण झुग्गियों की शिफ्टिंग को टाल दिया गया है। यदि चुनावी साल में झुग्गियों को हटाकर शिफ्टिंग की जाती है तो क्षेत्रीय भाजपा के उम्मीदवार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता था। एक ओर जहां जितनी झुग्गियां हटाई जानी हैं, उसके मतदाता कम हो जाते, वहीं इसका असर अन्य मतदाताओं पर भी पड़ता, जिससे इस कार्यवाही को रोक दिया गया है।
दो सैकड़ा झुग्गियां हैं चिंहित
रेलवे, जिला प्रशासन व नगर निगम ने बरखेड़ी फाटक से सुभाष फाटक तक 182 झुग्गियों को चिन्हित किया है। ये ट्रेन परिचालन में सालों से बाधक है। इसे देखते हुए कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने एक साल पहले हबीबगंज से भोपाल के बीच ट्रेनों की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा की थी। ट्रैक किनारे बनी झुग्गियों से होने वाले संभावित हादसों को देखते हुए ऐसा किया था। तभी से इन्हें हटाने की कार्रवाई तेज हो गई। इसी बीच साल 2017 के आखिरी में हबीबगंज स्टेशन के पास युवती के साथ सामूहिक ज्यादती का मामला सामने आया। इसमें से कुछ आरोपित ट्रैक किनारे बनी झुग्गी बस्ती में रहने वाले थे, जो कि घटना को अंजाम देने के बाद झुग्गियों मे छुपे थे। इतना ही नहीं बरखेड़ी से सुभाष फाटक के बीच भी बदमाश झुग्गियों की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। इन सभी कारणों को देखते हुए 182 में से 78 झुग्गियों को हटाने का निर्णय लिया गया है। पुलिस, आरपीएफ की मौजूदगी मे संयुक्त कार्रवाई शुक्रवार से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे टाल दिया गया है।
16 मीटर दूर हैं झुग्गियां
रेलवे की जमीन पर करीब 182 झुग्गियां हैं। सर्वे में पता चला है कि रेलवे ट्रैक से 16 मीटर के दायरे में ऐशबाग से पात्रा पुल तक करीब 78 झुग्गियां आ रही है। इन्हें नोटिस जारी कर दिया है। झुग्गियों पर लाल निशान से क्रास भी लगाए गए हैं। बकायदा अनाउंसमेंट भी करवाया जाकर उन्हें समय दिया जा चुका है।
झुग्गीवासियों के लिए जब आवास की व्यवस्था हो जाएगी, तभी उन्हें वहां से हटाया जाएगा, अभी इनके लिए आवास की व्यवस्था नहीं हो पाई है, इसलिए इसे आगे बढ़ा दिया गया है।
> जीपी माली, एडीएम
जिला प्रशासन से हमने पुलिस बल मांगा था, लेकिन उनकी तरफ से जवाब आया है कि दिसंबर के बाद ही बल दिया जा सकता है। चुनाव के चलते बल की कमी बनी हुई है।
> विवेक सागर, सीनियर कमांडेंट आरपीएफ भोपाल


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