ब्रह्माजी ने करवाया था इन 22 कुंडों का निर्माण

देवता भी करते हैं यहां स्नान, चर्मरोग के लिए अमृत है इसका पानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक यज्ञ का आयोजन कराया था। लोगों में ऐसी मान्यता है कि पवित्र जलस्रोतों में स्नान करने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं, तो कहीं किसी कुंड में स्नान करने से कई बीमारियों से निजात मिलती है। दूसरी ओर कुंड का पानी गर्म होने के कारण सर्दियों में आने वाले पर्यटक भी स्नान करते हैं। मान्यता चाहे जो भी हो आज कुंड धार्मिक स्थलों के नजदीक होने के कारण लोगों की आस्था से खासतौर पर जुड़े हैं। जानते हैं बिहार के एक ऐसे कुंड के बारे में जिसकी चर्चा विदेशों तक है।
करेंगे ये उपाय तो चमकती रहेगी किस्मत
राजधानी पटना से महज 85 किलोमीटर की दूरी पर राजगीर ब्रह्मा की यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केंद्र एवं जैन तीर्थंकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधना भूमि रहा है। राजगीर में गर्म पानी का कुंड है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक यज्ञ का आयोजन कराया था। इसी दौरान यहां आए देवी-देवताओं को एक ही कुंड में स्नान करने में परेशानी होने लगी।
1600 किलो घी और मक्खन से बना दी मां दुर्गा की मूर्ति
मां की एक झलक से दूर हो जाती हैं ये तकलीफेंतभी ब्रह्मा ने यहां 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण कराया था। वैभारगिरी पर्वत की सीढिय़ों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने हैं। यहां हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।


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