निवेशक बेच रहे बांड, 11 बैंकों की हालत खस्ता

एजेंसी ॥ नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में नकदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए बाजारों से 10,000 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक आगे भी बॉंडों की पुनर्खरीद जारी रख सकता है। गुरुवार को खरीदे गए बांडों का कारोबार बहुत ज्यादा नहीं है और इनमें से अधिकांश बैंकों के पास थे। पुनर्खरीद से इन बैंकों के पास नकदी आएगी। आरबीआई की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई व्यवस्था में शामिल 11 बैंकों की हालत खस्ता है। इन बैंकों की सामान्य कारोबारी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा है और उन्हें नकदी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अगर आरबीआई ने उन्हें पर्याप्त नकदी समर्थन नहीं दिया तो उनके लिए गंभीर स्थिति बन सकती है। वे अपने बॉन्डों पर डिफॉल्ट कर सकते हैं। इंडियन ओवरसीज बैंक ने अतिरिक्त टियर-1 बांड वापस ले लिए और वह ऐसा करने वाला पीसीए में शामिल अंतिम बैंक है। इन बांडोंं को जारी करने वाले के पास वित्तीय संकट की स्थिति में ब्याज के भुगतान में देरी करने और यहां तक कि इससे इनकार करने का भी विकल्प था। विशेषज्ञों ने कहा कि बॉन्ड वापस लेने की अनुमति देकर सरकार और आरबीआई ने इन बैंकों को कुछ हद तक राहत दी है। सरकार के पास ऐसा करने के अपने कारण हैं। बॉन्डों की प्रकृति को देखते हुए ब्याज के भुगतान में देरी तकनीकी रूप से डिफॉल्ट नहीं है लेकिन बाजार इसे डिफॉल्ट मानेगा। चूंकि इन बैंकों में सरकार की गारंटी अंतर्निहित है, इसलिए इस तरह की घटनाओं से खुद सॉवरेन की साख प्रभावित होती है। लेकिन बैंकों के तय आय वाली अन्य प्रतिभूतियों के पास देर से भुगतान या वापसी की आजादी नहीं है।
म्यूचुअल फंड में एसआईपी के साथ रिटायरमेंट की प्लानिंग
पिछले दशक में लोगों की औसत उम्र में इजाफा हुआ है और इसी के साथ खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। इसलिए यह आवश्यक है कि रिटायर्ड जिंदगी के लिए बहुत पहले योजना बना ली जाए ,ताकि असुविधा से बचा जा सके। इसके लिए कंपनियां हर रेंज की आमदनी वाले लोगों को वित्तीय समावेशन मुहैया कराने व सशक्त बनाने के लिए पेशकश कर रही हैं। समृद्ध रिटायर्ड जिंदगी के लिए म्यूचुअल फंड के पास समाधान है। म्यूचुअल फंड सबसे सरल तरीके से जवाब प्रदान करते हैं। ये आम निवेशकों को विशेषज्ञों के जरिए इक्विटीज तक पहुंच मुहैया कराती हैं, इस कारोबार के अनुभवी पेशेवर लोगों को सुरक्षित तरीके से निवेश करने व सम्पत्ति निर्माण का मौका देते हैं। बहुत सी शीर्ष म्यूचुअल फंड कंपनियां अपनी फ्लैगशिप स्कीमें पेश करती हैं जिन्हें खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं। ये योजनाएं अक्सर एसआईपी रूट यानी सिस्टमेटिक इन्वैस्टमेंट प्लान के जरिए उपलब्ध होती हैं, विभिन्न मूल्य वर्गों में ये स्कीमें हर माह आसानी से निवेश करने का मौका देती हैं। उदाहरण के लिए टाटा रिटायरमेंट सेविंग्स फंड एक ओपन,ऐंडेड रिटायरमेंट सॉल्यूशन.ओरियेंटिड स्कीम है जिसका लॉक इन 5 साल या रिटायरमेंट की उम्र है। इसमें असैट अलोकेशन के तीन कॉम्बिनेशन ऑफर किए जाते हैं, प्रोग्रैसिव, मॉडरेट और कंजरवेटिव। इसके पीछे विचार यह है कि निवेशक को इक्विटी और डेट के बीच अपनी निवेश राशि के आवंटन की आजादी मिल जाती है। इस तरह रिटायरमेंट की जरूरत व लक्ष्यों के मुताबिक योजना को बना दिया जाता है। यह प्लान एक खास ऑटो स्विच फीचर के साथ आता है जो इविक्टी, डेट के अनुपात को निवेशक की बढ़ती उम्र के साथ ऐडजस्ट करने के झंझट से मुक्त कर देता है।


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