ई-नाम से 200 मंडियां और जुड़ेंगी

वाणिज्य प्रतिनिधि ॥ भोपाल
मध्यप्रदेश की 58 मंडियों सहित 14 राज्यों की 585 मंडियों को ई-नाम से जोडऩे के बाद केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष में 200 और थोक मंडियों को ऑनलाइन मंच ई-नाम से जोड़ेगी। ई-नाम (इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार) की शुरुआत अप्रैल 2016 में की गई थी। मंडियों के बीच आपस में लेन-देन बढ़े साथ ही ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से उपज की क्रय-विक्रय से किसान और व्यवसायियों को लाभांवित हो। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार इस वर्ष ई-नाम से 200 और मंडियों को जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है,लेकिन प्राथमिकता मंडियों के बीच आपस में ऑनलाइन कारोबार को बढ़ावा देने और गुणवत्ता को बेहतर करने को दी जाएगी। इसके अलावा सरकार का प्रयास होगा कि वह गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें ताकि एक बार मंडियों के बीच आपस में ऑनलाइन कारोबार की स्थिति बनने के बाद अन्य मंडियों को जोडऩा आसान हो जाए।
गौरतलब है कि ईनाम पर ऑनलाइन कारोबार वेबसाइट, उसके कारोबारी मंच या मोबाइल ऐप से किया जा सकता है। यह कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। अभी तक इस प्रणाली से 14 राज्यों के एक लाख से ज्यादा कारोबारी, 53,163 कमीशन एजेंट और 73.50 लाख किसान जुड़ चुके हैं। यह 14 राज्य मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं। कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग (डीएसीएंडएफडब्ल्यू) राज्यों के लिए सॉफ्टवेयर और इसके अनुकूलन के खर्च का भुगतान करके इसे नि:शुल्क प्रदान कर रही है। डीएसी और एफडब्ल्य ने ई-मार्केट प्लेटफार्म की स्थापना के लिए 585 नियमित मंडियों में संबंधित उपकरण आधारिक संरचना के लिए 30 लाख रूपए प्रति मंडी निजी मंडियों से अलग की बिक्री के आधार पर एक बार निर्धारित कीमत भी अनुदान के रूप में दे रहे है। राज्य सरकार एपीएमसी के नामों को प्रस्तावित करेगी, जहां यह परियोजना कार्यान्वित होगी।
कार्यदल का गठन : ग्रेडिंग और व्यापारियों की जरूरतों का होगा अध्ययन
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन मंडी बोर्ड ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक कार्यदल का गठन किया है। इनमें मंडी सचिव से लेकर निरीक्षक,उप निरीक्षक आदि को भी शामिल किया गया है। मंडी बोर्ड के सूत्रों ने बताया कि तकनीकी और प्रबंधकीय रूप से दक्ष योग्यता धारक टीम के अधिकारी प्रदेश की मंडियों एवं उप मंडियों में भंडारण, ग्रेडिंग, भंडारण से लेकर किसानों, व्यापारियों की जरूरतें, कौन सी फसल कहां ज्यादा पैदा हो रही हैं, उसके विपणन की क्या स्थिति है, इसकी गणना करके अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसकी जानकारी मंडी बोर्ड के आयुक्त फैज अहमद किदवई को देंगे। बोर्ड के जानकारों का कहना है कि संभवत: प्रदेश में यह पहला प्रयोग है, इसमें प्रदेश की सभी 257 कृषि उपज मंडियां एवं उपमंडियों तथा उनमें बिक्री के लिए आने वाली फसलों के बारे में जानकारी इकत्र की जाएगी। बताया जाता है कि इस रिपोर्ट के आधार पर किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। यदि कोई फसल पास की मंडी में कम भाव पर बिक रही है तो उसे दूर की मंडी में बेचने की व्यवस्था कैसे की जा सकती है, इस पर भी अधिकारी मंथन कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
बेहतर काम करने वाली मंडी और व्यापारी होंगे पुरस्कृत
मध्यप्रदेश सरकार अब मंडियों और मंडी व्यापारियों को उनके बेहतर काम करने की कार्यशैली के आधार पर पुरस्कृत करेगी। सरकार कर्मचारियों को अहसास कराना चाहती है कि मंडी का वर्तमान स्वरूप यथावत रहेगा। योजना में मंडियों को सामूहिक,जबकि व्यापारियों को व्यक्तिगत पुरस्कार दिए जाएंगे।
22 मंडियों का होगा चयन
ए, बी, सी और डी ग्रेड की सभी मंडियों और अंतर्राज्यीय नाकों की 3, ई-नाम की 3 मंडियों सहित कुल 22 मंडियों का चयन किया जाएगा। हर ग्रेड की 4 मंडियां शामिल होगी। सबसे अधिक आवक, सबसे अधिक आय के आधार पर मंडियों का चयन किया जाएगा। व्यक्तिगत पुरस्कार में हर ग्रेड की मंडी से 3 और ई-मंडी के 3 व्यापारियों को मिलाकर कुल 15 व्यापारियों को पुरस्कृत किया जाएगा। जून में मंडी सम्मेलन में मुख्यमंत्री इसकी शुरुआत करेंगे।
पुरस्कृत मंडी को मिलेंगे 4 लाख रुपए
चयनित 22 मंडियों को 4.4 लाख रुपए पुरस्कार के रूप में दिए जाएंगे। इस राशि से मंडी स्तर पर अधोसंरचना, स्वच्छता, किसानों के लिए सुविधा केंद्र आदि काम करवाए जाएंगे। वहीं व्यक्तिगत पुरस्कार के तौर पर ए-ग्रेड की मंडी के 3 व्यापारियों को 50 हजार, बी-ग्रेड की मंडी के व्यापारी को 40 हजार, सी-ग्रेड की मंडी के व्यापारी को 30 हजार और डी-ग्रेड की मंडी व्यापारी को 25 हजार रुपए प्रति व्यापारी पुरस्कार मिलेगा।
जो अच्छा काम करते हैं, उन्हें प्रशंसा के साथ पुरस्कृत भी किया जाना चाहिए। इससे मंडी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। पुरस्कृत राशि से मंडी समिति अपने स्तर पर इनका उपयोग करने में स्वतंत्र रहेगी।
फैज अहमद किदवई, प्रबंध संचालक, मंडी बोर्ड


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