वन कर्मचारियों की हड़ताल के सवाल पर एसीएस बोले – थैंक्यू

अफसरशाही ॥ प्रदेश के जंगल कट रहे, वन्य प्राणी असुरक्षित, अफसर मौन
सच प्रतिनिधि ॥ भोपाल
प्रदेश के वन्य क्षेत्रों में तैनात वनकर्मी अनिश्चिकालीन हड़ताल पर हैं। जंगलों में धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं। तस्करों का कारोबार फल-फूल रहा हैं। वन्य प्राणियों का आए दिन शिकार हो रहा है लेकिन वन विभाग के अफसर अपनी गाडिय़ों की फाइलें मंजूर करवाने में व्यस्त है। वन विभाग के एसीएस ने वनकर्मियों की हड़ताल और वेतनविसंगति के सवाल पर थैंक्यू कहा है।
प्रदेश भर के वनकर्मी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चिकालीन हड़ताल पर है। इधर वन विभाग के अधिकारी अपनी गाडिय़ों की फाइलों को मंजूर करवाने में जुटे हुए है। वनकर्मियों की हड़ताल व रेंजर्स की वेतन विसंगति के बारे में वन विभाग के अपर सचिव केके सिंह से बात की तो उन्होने कहा कि मुझे वेतन विसंगति और हड़ताल के बारे में कोई भी कमेंट नहीं करना है…थैक्यू। एसी केबिन में बैठे उच्च अधिकारियों को वन क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटाई और वन्य प्राणियों की चिंता नहीं है। वनकर्मियों के हड़ताल में रहने से वन्य क्षेत्रों में शिकारियों और लकडिय़ों की तस्करी का करोबार बढ़ गया है। वहीं प्रदेश की वन संपदा को भी रोजाना लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है। अबतक तीन दर्जन से ज्यादा वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है। जिसमें हिरण, चीतल, भालू और जंगली सुअर की तादाद ज्यादा है। वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष निर्मल तिवारी का कहना है वन कर्मचारी संघ की हड़ताल से वन विभाग को काफी नुकसान हुआ है। प्रदेश भर के वन्य प्राणी असुरक्षित हैं। इसके बाद भी सरकार और वन विभाग के अमले के पास सुरक्षा के इंतजाम नहीं है आए दिन वन विभाग के अफसर कर्मचारियों पर हड़ताल खत्म करने का दबाव बना रहे है।
वन कर्मचारी संघ की मुख्य मांगें
कर्मचारियों की मुख्य मांगे वेतन विसंगति, आवास सुविधा, 12 घंटे ड्यूटी, वन हानि पर कर्मचारियों से वसूली न करना, वन क्षेत्रपालों के ग्रेड पे 3600 के स्थान पर 4200 करना व प्रशिक्षण अवधि को सेवाकाल मानने सहित 19 मांगे है।
पड़ोसी राज्यों की अपेक्षा प्रदेश के रेंजर्स
का वेतन कम
मध्य प्रदेश के वन्य क्षेत्रों में तैनात रेंजरों का वेतनमान पड़ोसी राज्यों से अपेक्षा सबसे कम है जबकि महाराष्ट्र, यूपी और छत्तीसगढ़ के रेंजरों का वेतनमान अधिक है। प्रदेश में रेंजरों का पे ग्रेड 3600 सौ रुपए है। वहीं महाराष्ट्र में रेंजर का पे ग्रेड 4800 सौ रुपए है। इस वेतनविसंगति चलते राज्य वन सेवा स्तर के अधिकारी व अन्य वनकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश के वन मंडलों में तैनात रेंजरों का वेतन अन्य पड़ोसी राज्यों के रेंजरों के वेतनमान से कम है जबकि मध्य प्रदेश का वनक्षेत्र भी सबसे अधिक है। छत्तीसगढ़ तो पहले मध्य प्रदेश का ही हिस्सा था, साल 2000 में विभाजित हुआ था। वहां तैनात रेंजरों का पे ग्रेड अधिक है।
राज्य वेतनमान
मध्य प्रदेश 3600 पे ग्रेड
छत्तीसगढ़ 4300 पे ग्रेड
उत्तर प्रदेश 4400 पे ग्रेड
महाराष्ट्र 4800 पे ग्रेड
हमारी मांगों के लेकर अफसर गंभीरता नहीं से नहीं ले रहे हैं। बीते दिनों वन विभाग के एसीएस केके सिंह ने मुलाकात कर की थी उन्होंने कहा था कि हड़ताल खत्म करें मैं मांगों पर चर्चा करुंगा लेकिन संघ ने साफ कर दिया था कि आदेश होने के बाद ही हड़ताल समाप्त की जाएंगी।
> आमोद तिवारी, महामंत्री, वनकर्मचारी संघ


facebook - जनसम्पर्क
facebook - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
twitter - जनसम्पर्क
twitter - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
जिला प्रशासन इंदौर और शासन की दैनंदिन गतिविधियों और अपडेट के लिए फ़ॉलो करें