साईं बाबा को भोग लगवाने भक्त करते हैं सालों तक इंतजार

साईं बाबा के प्रति लोगों की आस्था किसी से छुपी नहीं है। साईं बाबा को सभी धर्मों के लोग पूजते हैं। ग्वालियर के प्रसिद्ध साईं बाबा मंदिर में भक्त अपनी मुरादों की पूर्ति के लिए आते हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि इस मंदिर में बाबा को भोग लगाने के लिए लोग सालों से इंतजार कर रहे हैं। जी हां, साईं बाबा को लगने वाले भोग के लिए भक्तों को 3-4 साल बाद की डेट मिलती है। जिसे लोग खुशी-खुशी लेने के लिए राजी हो जाते हंै।
ग्वालियर के विकासनगर में 1978 में साईं बाबा मंदिर की स्थापना हुई थी। सन् 1991 से मंदिर में बाबा को भोग लगाने की शुरुआत की गई। जिसमें लोगों के भोग की बुुकिंग कर भोग लगाया जाता था। धीरे-धीरे बाबा को भोग लगाने की प्रचलन बड़ता चला गया। वर्तमान में बाबा को भोग लगाने वालों की लिस्ट 2021 तक जा पहुंची हैं। अगर आप साईं बाबा को भोग लगावाना चाहते हैं तो आपको 22 नवंबर 2021 के बाद की डेट मिलेगी।
पहले चार बार और अब छह
बार लगता है भोग
2016 के आखिर तक साईं बाबा को दिन में 4 बार भोग लगता था। 2 बार सुबह की आरती के समय और 2 बार शाम की आरती के समय। एक दिन में चार भक्तों को साईं बाबा को भोग लगाने का सौभाग्य मिलता था। लेकिन साल 2017 से बाबा को लगने बाले भोग में बढ़ोतरी करते हुए चार से छह बार कर दिया है। अब बाबा को दिन में सुबह-शाम का मिला कर 6 बार भोग लगाया जाता है। भक्तों को सहूलियत देते हुए साईं बाबा मंदिर कमेटी ने 2017 नई बुकिंग करना शुरु किया है। नई बुकिंग में भी अप्रैल माह तक की बुकिंग हो चुकी है।
देशभर से आते हैं भोग लगाने वाले
साईं बाबा को भोग लगाने वालों में शहर से ही नहीं बल्कि पूरे देश से लोग आते हैं। दिल्ली, भोपाल, इंदौर, झांसी, टीकमगढ़, दतिया, भिण्ड आदि शहरों से लोग बाबा को भोग लगाने के लिए सालों से नंबर लगाये हुए हैं। जिनमें कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होने 2012 में नंबर लगाये हुए हैं जिनका 2017 में आकर नंबर आया है।
बाबा की रसोई में बनता है भोग
साईं बाबा को जो भोग लगता है वह मंदिर परिसर में ही स्थित बाबा की रसोई में बनाया जाता है। भोग में पूड़ी, दो सब्जी, खीर, मिठाई, पापड़ आदि खाना बनता है। मंदिर के पुजारी बाबा को भोग लगाते हैं। भोग लगने के बाद पूरा भोग संबंधित व्यक्ति को दे दिया जाता है जिनका नंबर लगा हुआ होता है।
फोन और मैसेज से देते हैं सूचना
बोर्ड भी लगाया
मंदिर के कोषाध्यक्ष आनंद सावंत ने बताया कि भोग के लिए भक्तों के नाम, रसीद नं, मोबाइल नंबर और पता रजिस्टर में लिख लेते हैं। जिस दिन बाबा को जिस भी भक्त का भोग लगना होता है उसे एक दिन पहले फोन करके और मोबाइल पर मैसेज भेज कर सूचना प्रदान कर दी जाती है। मंदिर में दिन के हिसाब से जिस भी व्यक्ति का भोग का नंबर होता है, उसका नाम बोर्ड पर लिखा रहता है। हर गुरुवार को मंदिर पर आम लोगों के लिए भण्डारा होता है जिसे मंदिर से जुड़े लोग और बाबा के भक्त मिलकर आयोजित करते हैं।


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