दिल्ली-एनसीआर में हवा की रफ्तार हुई कम, कल तक पॉल्‍यूशन से राहत की उम्मीद नहीं

दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है. शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गुरुवार सुबह 389 दर्ज की गई, जो कि मंगलवार को 372 थी. यह नवंबर का छठा दिन है, जब AQI का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी के पास बना हुआ है. इस महीने अब तक आठ दिन ‘गंभीर’ स्तर पर दिल्ली का  AQI दर्ज किया गया है. हालांकि, अभी फिलहाल शुक्रवार तक इससे राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.

बुधवार को गंभीर स्तर पर रहा प्रदूषण

बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) 301 से 400 के बीच AQI को ‘बहुत खराब’ और 401-500 की रीडिंग को गंभीर मानता है. CPCB के अनुसार, दिल्ली के हवा की गुणवत्ता बुधवार सुबह ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई थी. हालांकि, इसके बाद हवा की गति में तेजी देखी गई और  AQI सुधर कर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया. दिल्ली में बुधवार सुबह 11 बजे AQI 422, दोपहर 12 बजे 420 और दोपहर 3 बजे यह 341 रहा.

दिल्ली के विभिन्न इलाकों का हाल

दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों की बात करें तो अलीपुर में  AQI 414, द्वारका में 406, आईटीओ में 343, आरके पुरम में 415, पंजाबी बाग में 424, लोधी रोड में 355, आईजीआई एयरपोर्ट में 398, पटपड़गंज में 398, अशोक विहार मे 386, रोहिणी में 419, नजफगढ़ में 371, बवाना में 441, मुंडका में 424, आनंद विहार में 387, बुराड़ी में 368 और न्यू मोती बाग में 395 दर्ज किया गया.

एनसीआर में प्रदूषण का स्तर

वहीं, एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति भी काफी अच्छी नहीं है. यहां भी प्रदूषण का स्तर लगातर बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है. वायु गुणवत्ता की बात करें तो नोएडा में  AQI 350, ग्रेटर नोएडा में 327, गुरुग्राम में 338, गाजियाबाद में 342 और फरीदाबाद में 378 दर्ज किया गया.

शांत हुई हवा

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक शहर के बेस स्टेशन सफदरजंग में शांत हवा की स्थिति दर्ज की गई, जबकि पालम में हल्की हवा देखी गई. हवा की गति सफदरजंग में दोपहर 12.30 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच लगभग 12 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई. हालांकि, शाम होते- होते इसमें गिरावट आ गई और हवा की गति घटकर लगभग 8 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई. इसके बाद बुधवार रात तक घटकर शून्य हो गई.

पराली जलाने की हुई घटनाएं

मौसम विभाग के अनुसार, तेज गति की हवा प्रदूषण फैलाने वाले कारकों को हटाने में मदद करती है, जिससे प्रदूषण के स्तर में कमी देखने को मिलती है. वहीं, शांत हवा इन कारकों के जमा होने का कारण बनती है. CPCB के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कारण पड़ोसी राज्यों में पराली का जलाया जाना है. बुधवार को पंजाब में पराली जलाने की संख्या 512, हरियाणा में 62 और उत्तर प्रदेश में 217 रही. इसके तहत दिल्ली में पराली जलाने से प्रदूषण का योगदान 13.6% रहा. अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में हवा की गुणवत्ता शुक्रवार तक ‘बहुत खराब’ रहने की आशंका है.


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