मध्यप्रदेश ने नहीं दिए 500 करोड़, केंद्र ने रोक दिए स्मार्ट सिटी के 700 करोड़

भोपाल.भोपाल-इंदौर समेत प्रदेश में प्रस्तावित 7 स्मार्ट सिटी की राह में अब राज्य की खराब माली हालत रोड़ा बन रही है। स्मार्ट सिटी निर्माण के लिए राज्य सरकार के पास अपने हिस्से की अंशपूंजी देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। केंद्र सरकार ने फंडिंग के लिए ऐसी शर्त जोड़ दी है, जो राज्य सरकार के लिए गले की फांस बन गई है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर कह दिया है कि जब तक राज्य सरकार स्मार्ट सिटी निर्माण के लिए अपने हिस्से की राशि नहीं देगा, तब तक केंद्र भी अपने हिस्से का कैपिटल शेयर जारी नहीं करेगा। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य दोनों की बराबर अंशपूंजी वाली इस योजना के तहत हर स्मार्ट सिटी के निर्माण पर कुल एक हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं, जिसमें से 500 करोड़ रुपए केंद्र सरकार की और 500 करोड़ राज्य सरकार की हिस्सेदारी है। दोनों को यह राशि 5 साल तक 100-100 करोड़ रुपए की किस्त के रूप में देना हैं।

सागर-सतना को तो अभी कुछ मिला ही नहीं

सबसे आखिर में स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल हुए सागर-सतना को न ही अब तक बजट में हिस्सेदारी नहीं मिल है और न ही यहां स्मार्ट सिटी कंपनी का गठन हो पाया है।
कोई भी शहर नहीं कर पाया खर्च: प्रदेश के सातों शहरों में स्मार्ट सिटी के लिए काम अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। भोपाल में पॉलिटेक्निक चौराहा से भारत माता चौराहे तक बनने वाली स्मार्ट रोड का काम अड़चनों की वजह से बार-बार अटकता है। इंदौर में स्मार्ट सिटी के लिए अभी अवैध निर्माण तोड़े जाने हैं और साइट क्लियर करने की प्रक्रिया चल रही है। कोई शहर ऐसा नहीं है, जो बजट में मिली राशि को पूरा खर्च कर पाया हो।

वित्त विभाग ने लगाया अड़ंगा

राज्य सरकार से पहली किश्त में पांचों शहर के लिए 100-100 करोड़ रुपए के हिसाब से 500 करोड़ रुपए जारी हुए थे, लेकिन वित्त विभाग ने दूसरी किस्त के 500 करोड़ रुपए जारी नहीं किए हैं। वित्त विभाग ने आपत्ति लगाई है कि जब मौके पर स्मार्ट सिटी का काम धीमी रफ्तार से चल रहा है तो हम राशि क्यों जारी करेंगे और बजट राशि जारी नहीं की। वहीं केंद्र सरकार ने भी अगली किस्त का पैसा रोक लिया। अब बजट के बाद तीसरी किस्त की बारी आ चुकी है, लेकिन दूसरे राज्यों की तुलना में धीमी रफ्तार से प्रोजेक्ट पर काम के चलते ये राशि अटक जाएगी।

असर… स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट लेट होगा
स्मार्ट सिटी के लिए धीमी रफ्तार पर काम चलते रहेंगे तो नई किस्त जारी नहीं होगी। जिससे काम पूरे होने में 6 से 7 साल लगेंगे। यानी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पूरा होने में ज्यादा समय लग जाएगा। केंद्र राज्य सरकार के आगामी प्रोजेक्ट में धीमी रफ्तार के चलते आपत्ति लगा सकता है।

एडीबी से कर्ज लेने की तैयारी

राज्य सरकार स्मार्ट सिटी के लिए एशियन विकास बैंक (एडीबी) से कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। स्मार्ट सिटी मिशन नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग ने 2500 करोड़ के कर्ज का एक प्रस्ताव बनाया है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर सभी शहरों में काम चल रहा है। राज्य का अंशदान नहीं होने के आधार पर केंद्र सरकार ने नई किस्त जारी नहीं की है। राज्य ने बजट में प्रावधान कर दिया है। अभी हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। काम बढ़ने पर राज्य अपना अंश जारी कर देगा।


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