स्पीड गवर्नर के लिए अब 1500 की बजाय खर्च करने होंगे छह हजार -परिवहन विभाग ने रोज मार्टा कंपनी के मॉडल को किया अपडेट

 

विशेष संवाददाता, भोपाल

वाहनों में स्पीड ब्रेकर लगाने के लिए अब वाहन चालकों को डेढ़ हजार रुपए की बजाय छह हजार खर्च करने होंगे। परिवहन विभाग ने रोज मार्टा कंपनी के मॉडल को अपडेट किया है, जिसकी शुरूआती कीमत 6  हजार रुपए है। इतनी राशि खर्च करने के बाद ही विभाग से फिटनेस सार्टिफिकेट जारी किया जाएगा। वाहन संचालकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।

इंदौर में डीपीएस बस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने नियम-कायदों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। असल में डीपीएस की बस में

स्पीड गवर्नर नहीं लगा था, जबकि बस पर फिटनेस सर्टिफिकेट था। प्रदेश में कई कंपनियां स्पीड गवर्नर लगाने का काम कर रही थी। पहले  1500 से 2500 हजार रुपए खर्च करने पर स्पीड गवर्नर लगवाने पर फिटनेस मिल जाती थी, लेकिन उन स्पीड गवर्नर में फीचर नहीं रहते थे, उसका तार निकालकर वाहन स्पीड में दौड़ रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग ने 30 जनवरी को स्पीड गवर्नर लगाने के नियम बदल दिए थे।

नियम बदलने के बाद कोई भी कंपनी प्रदेश में स्पीड गवर्नर नहीं लगा पाएगी। परिवहन मुख्यालय में स्पीड गर्वनर बनाने वाली तीन कंपनियों के आवेदन आए थे, जिसमें रोज मार्टा कंपनी को अधिकृत कर दिया है। सर्वर में इसके मोडल भी फीड कर दिए हैं। इस कंपनी का मोडल होने पर फिटनेस मिलेगी और अब वाहन संचालकों को ज्यादा राशि खर्च करनी होगी।

कार्यालय में बन रही

विवाद की स्थिति

 

स्पीड गवर्नर को लेकर आरटीओ की फिटनेस शाखा में प्रतिदिन विवाद की स्थिति बन रही है। वाहन मालिक 1500 से 2500 रुपए का स्पीड गवर्नर लगवा चुके हैं, लेकिन सर्वर उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा है। जिसके चलते वाहन संचालक विरोध कर रहे हैं, क्योंकि वे एक साल पहले पैसे खर्च कर चुके हैंं। एक बार वाहन को फिटनेस के लिए लाने पर तीन से चार दिन बेकार होते हैं। अगर नंबर आने पर फिटनेस नहीं मिलती है तो वह अपना विरोध जताते हैं। वाहन काफी दिनों से खड़ा होने पर वाहन संचालक को नुकसान होता है।

उत्पादक को रखना पड़ेगा स्पीड गवर्नर का रिकॉर्ड-

– स्पीड गवर्नर उत्पादक को भोपाल में डाटा सेंटर बनाना होगा। यहां हर स्पीड गवर्नर का डाटा सेव करना पड़ेगा। गाडी नंबर, स्पीड गवर्नर का मोडल नंबर भी सेव करना होगा।

– वाहन में स्पीड गवर्नर लगाने के बाद रोटो सील से सील करना होगा। अगर इससे छेड़छाड़ होती है तो स्पीड गवर्नर किसी काम का नहीं रहेगा।

– स्पीड गवर्नर के ऊपर उसकी टेस्ट रिपोर्ट, मॉडल नंबर व वाहन का नंबर लिखना पडेगा।

– फिटनेस के लिए आने वाले वाहन में लगे स्पीड गवर्नर की पूरी जानकारी परिवहन विभाग के कर्मचारी को स्कैन करनी होगी। मशीन से स्कैन होने के बाद जानकारी सर्वर में लोड करनी पड़ेगी। साथ ही उत्पादक व डीलर, वाहन क्रमांक, गवर्नर की टेस्ट रिपोर्ट व उसे वाहन में लगाने की तारीख भी सर्वर में लोड करनी होगी।


facebook - जनसम्पर्क
facebook - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
twitter - जनसम्पर्क
twitter - जनसम्पर्क - संयुक्त संचालक
जिला प्रशासन इंदौर और शासन की दैनंदिन गतिविधियों और अपडेट के लिए फ़ॉलो करें